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मोबाइल की स्क्रीन से बाहर
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...................... Start ..................... रात के दो बज रहे थे। कमरे की सारी लाइटें बंद थीं। केवल मोबाइल की नीली रोशनी एक चेहरे पर पड़ रही थी। वह चेहरा था 22 साल के विवान का। उसकी उंगलियाँ लगातार मोबाइल स्क्रीन पर चल रही थीं। एक रील खत्म होती, दूसरी शुरू हो जाती। एक वीडियो के बाद दूसरा। एक घंटे के बाद दूसरा घंटा। उसे पता ही नहीं चला कि कब रात के दो बज गए। तभी उसकी मां का मैसेज आया— "बेटा, कल इंटरव्यू है। जल्दी सो जाना।" विवान ने मैसेज देखा, लेकिन जवाब नहीं दिया। उसने सोचा— "अभी पांच मिनट और।" लेकिन वह पांच मिनट कब एक घंटे में बदल गया, उसे पता ही नहीं चला। सुबह जब आंख खुली, तब घड़ी में 10 बज रहे थे। इंटरव्यू सुबह 9 बजे था। वह बिस्तर से उछलकर उठा। मोबाइल देखा। कंपनी के तीन मिस्ड कॉल थे। इंटरव्यू जा चुका था। मौका भी जा चुका था। विवान ने गुस्से में तकिया दीवार पर फेंक दिया। "मेरी किस्मत ही खराब है।" लेकिन अंदर कहीं एक आवाज आई— "सच में किस्मत खराब है या आदतें?" विवान एक आम लड़का था। उसके सपने बड़े थे। वह सफल बनना चाहता था। अमीर बनना चाहता था। मां-बाप का नाम रोशन करना चाहता था। लेकिन उसके सपनों और उसकी जिंदगी के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी थी। उसका मोबाइल। वह हर दिन मोटिवेशनल वीडियो देखता था। सक्सेस स्टोरी सुनता था। बिजनेस के बारे में सीखता था। लेकिन सिर्फ देखता था। कुछ करता नहीं था। उसे लगता था कि वीडियो देखकर ही वह बदल जाएगा। लेकिन बदलाव स्क्रीन पर नहीं, जिंदगी में काम करने से आता है। एक शाम वह अपने मोहल्ले के पार्क में बैठा था। निराश। हताश। खुद से नाराज़। उसी समय उसकी नजर एक बुजुर्ग व्यक्ति पर पड़ी। लगभग सत्तर साल की उम्र होगी। सफेद बाल। साधारण कपड़े। लेकिन चेहरे पर अजीब सा आत्मविश्वास। वह रोज पार्क में आते थे। उस दिन अचानक उन्होंने विवान से पूछा— "बेटा, इतने परेशान क्यों हो?" विवान पहले तो चुप रहा। फिर उसने दिल की सारी बात बता दी। असफलताएं। छूटे हुए मौके। टूटी हुई उम्मीदें। मोबाइल की लत। सब कुछ। बुजुर्ग व्यक्ति ध्यान से सुनते रहे। फिर मुस्कुराए। "कल सुबह पांच बजे यहां आना।" "क्यों?" "अगर जिंदगी बदलनी है तो आ जाना।" विवान को लगा कि शायद कोई ज्ञान की बात करेंगे। लेकिन अगले दिन वह पहुंच गया। सुबह पांच बजे। पार्क लगभग खाली था। ठंडी हवा चल रही थी। बुजुर्ग पहले से वहां मौजूद थे। उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस चलना शुरू कर दिया। विवान भी उनके पीछे चलने लगा। दस मिनट। बीस मिनट। तीस मिनट। आखिरकार विवान से रहा नहीं गया। "आप मुझे क्या सिखाने वाले हैं?" बुजुर्ग हंस पड़े। "यही।" "क्या?" "चलना।" विवान हैरान हो गया। बुजुर्ग बोले— "आज के ज्यादातर युवा दौड़ना चाहते हैं, लेकिन चलना नहीं चाहते।" "उन्हें करोड़पति बनना है, लेकिन रोज मेहनत नहीं करनी।" "उन्हें फिट होना है, लेकिन रोज व्यायाम नहीं करना।" "उन्हें सफल होना है, लेकिन असफलता का दर्द नहीं सहना।" विवान चुप था। बुजुर्ग आगे बोले— "बेटा, जिंदगी कोई वायरल वीडियो नहीं है।" "यह एक लंबी यात्रा है।" "जो रोज थोड़ा-थोड़ा चलता है, वही मंजिल तक पहुंचता है।" उस दिन के बाद विवान ने एक फैसला किया। वह अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश नहीं करेगा। वह अपनी आदतें बदलेगा। बस एक-एक करके। पहले दिन उसने मोबाइल का स्क्रीन टाइम कम किया। दूसरे दिन सुबह जल्दी उठा। तीसरे दिन एक घंटा पढ़ाई की। चौथे दिन एक नई स्किल सीखना शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। बहुत मुश्किल थी। कई बार उसका मन करता था कि सब छोड़ दे। कई बार पुरानी आदतें वापस खींचने लगती थीं। लेकिन हर बार उसे पार्क वाले बुजुर्ग की बात याद आती— "चलते रहो।" महीने बीत गए। धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा। उसका आत्मविश्वास बढ़ गया। उसकी सोच बदल गई। उसका समय सही जगह लगने लगा। अब वह सिर्फ सपने नहीं देखता था। उन पर काम भी करता था। एक साल बाद। विवान एक टेक कंपनी में काम कर रहा था। अच्छी सैलरी थी। घर वालों के चेहरे पर गर्व था। उसके दोस्त हैरान थे। उन्हें लगता था कि कोई बड़ा चमत्कार हुआ होगा। लेकिन विवान जानता था कि कोई चमत्कार नहीं हुआ। बस रोज थोड़ा-थोड़ा सुधार हुआ था। एक दिन वह फिर उसी पार्क में गया। वह बुजुर्ग वहां बैठे थे। विवान उनके पास गया। उनके पैर छुए। और कहा— "आप सही थे।" बुजुर्ग मुस्कुराए। "क्या सही था?" विवान की आंखों में चमक थी। उसने कहा— "मंजिल तक पहुंचने का राज दौड़ने में नहीं था।" "रोज चलते रहने में था।" बुजुर्ग मुस्कुराए। आसमान की ओर देखा। और बोले— "याद रखना बेटा..." "मोबाइल की स्क्रीन पर दूसरों की जिंदगी देखने से बेहतर है कि अपनी जिंदगी बनाना शुरू करो।" कहानी का संदेश आज की सबसे बड़ी समस्या अवसरों की कमी नहीं है। समस्या है ध्यान भटकाने वाली चीजों की अधिकता। मोबाइल, रील्स, शॉर्ट वीडियो और तुलना की दुनिया में युवा अपने सपनों से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन जो व्यक्ति रोज थोड़ा समय अपने लक्ष्य को देता है, वह एक दिन भीड़ से अलग खड़ा होता है। याद रखिए— "आपका भविष्य एक दिन में नहीं बदलता।" "लेकिन आपकी रोज की आदतें एक दिन आपका पूरा भविष्य बदल देती हैं।" ✨???????? ................. End .....................
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